प्रत्येक चैत्यवंदन करते समय इस क्रम का पालन करना चाहिए:
इस पर्वत पर विराजमान आदिदेव भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा और रायण वृक्ष के नीचे स्थापित उनकी चरण पादुकाओं की पूजा करके मेरा मन आनंदित हो उठता है। इस गिरिराज की महिमा अनंत है, जिसका पूरा बखान कोई नहीं कर सकता। चैत्र सुद पूर्णिमा (चैत्री पूनम) के दिन यहाँ की महिमा और भी अधिक बढ़ जाती है। मन में सच्ची भक्ति लाकर इस सुखदायक शत्रुंजय तीर्थ की सदा सेवा करनी चाहिए। palitana 5 chaityavandan in hindi full
अनंत सिद्धांनों आहे ठाम, सकल तीर्थनो राय;पूर्व नवाणुं ऋषभदेव, ज्यां ठाव्या प्रभु पाय। 2 सकल तीर्थनो राय
उवसग्गहरं पासवंजियं, वंदामि पासेमि णिच्चलं चैय। णमोत्थु णं जिणवरं, जिणवरे जिणसासणे णमोत्थु णं।। शांतिः शांतिः शांतिः। पूर्व नवाणुं ऋषभदेव
जो सिद्ध हैं, बुद्ध (ज्ञानी) हैं, मुक्त हैं, लोक के प्रकाशक हैं, जिन्होंने सब कर्मों को जीत लिया है, ऐसे जिनेंद्रों को, जो गुणों के भंडार हैं, मैं वंदन करता हूँ।
बोलकर आज्ञा लें और 'इच्छं' कहें।
इच्छामि वंदितुं जिणे, सव्वसिद्धे महाबले। लोगस्स उज्जोयगरे, दिण्णचक्के वरासणे।।