Ziyarat E Nahiya In Hindi //top\\ Instant
"काश मैं उस दिन तुम्हारे साथ होता और बड़ी कामयाबी को प्राप्त करता।" (यह लाइन बहुत मशहूर है - )
ज़ियारत-ए-नाहिया पढ़ने का महत्त्व (Significance)
ज़ियारत-ए-नाहिया: महवियत, इतिहास और हिंदी में इसका महत्व
क्या आपको ज़ियारत-ए-नाहिया का चाहिए? ziyarat e nahiya in hindi
इसकी शुरुआत हज़रत आदम (A.S.) से लेकर हज़रत मुहम्मद (S.A.W.W.) तक के महान पैगंबरों को सलाम भेजने से होती है .
: अंत में अल्लाह से इमामों के वसीले (Tawassul) से अपनी जायज़ हाजतें मांगें
यह आम तौर पर आशूरा (10 मुहर्रम) के दिन या उसके बाद पढ़ी जाती है, जिसमें इमाम हुसैन की शहादत के बाद की स्थिति और उनके परिवार पर हुए जुल्मों का जिक्र होता है। इसके गहरे अर्थ
इस ज़ियारत को पढ़ते हुए ऐसा महसूस होता है जैसे कोई आँखों देखा हाल बयान कर रहा हो। इसमें प्यास, भूख, ज़ख्मों और खेमों के जलाए जाने का विस्तृत वर्णन है।
इस लेख में हम ज़ियारत-ए-नाहिया के इतिहास, इसके गहरे अर्थ, इसके रचयिता और हिंदी में इसकी उपलब्धता व महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
इस ज़ियारत में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल हैं: ziyarat e nahiya in hindi
इसे पढ़ने से इंसान का अपने समय के इमाम से गहरा रूहानी रिश्ता कायम होता है।
चूंकि जुमा इमाम-ए-ज़माना का दिन है, इसलिए इस दिन इस ज़ियारत के ज़रिए अपने इमाम को पुरसा (शोक संदेश) दिया जाता है। निष्कर्ष (Conclusion)
कर्बला के शहीदों पर आँसू बहाना और उनके मार्ग पर चलने का संकल्प लेना आत्मा को पवित्र करता है और गुनाहों से दूर रहने की प्रेरणा देता है। निष्कर्ष
(सलाम हो उन सूखे हुए पवित्र शरीरों पर...)
ज़ियारत में उस दर्दनाक वक़्त का ज़िक्र है जब ख़ैमे (टेंट) जला दिए गए और अहल-ए-बेत (इमाम के परिवार) की ख़वातीन (महिलाएं) नंगे सर मक़्तल की तरफ दौड़ीं।